- सीत मिश्र
हम किससे न्याय चाहते हैं और कहाँ? ये बड़ा सवाल है। आप झुनझुना बजाते रहिये न्याय की, लोकतंत्र की। लेकिन जो तस्वीर है वो आम जन के हक़ की बात नहीं करती। जिसने शिकायत की वो 14 दिन से हिरासत में है, जिसके खिलाफ शिकायत हुई वो अस्पताल में आराम फरमा रहा है।
चिन्मयानंद तुम मर क्यों नहीं जाते !
तुम नहीं मरोगे क्योंकि तुम्हारे पास पैसे हैं, तुम्हारे समर्थन में बड़ा हुजूम है, तुम्हारे पास ताकत है, तुम्हारे ड्रामे पर यकीन करने वाले लोग हैं। कुछ दिन यूं ही और बिताओ अस्पताल में। यक़ीन मानो हम भी भूल जाएंगे कि तुम गुनहगार हो। हमें भी तो अपने हिस्से की रोजी-रोटी कमानी है, कब तक एक ही झमेले में पड़े रहेंगे।।
चिन्मयानंद तुम मर क्यों नहीं जाते !
लोग इतने मासूम हैं उन्हें लगता है कि चिन्मयानंद को फंसाने के लिए उस लड़की को भेज गया था। आप सोचिये, दिमाग लगाइए उस लडक़ी का अपना स्वार्थ हो सकता है, आखिर वहाँ गयी ही क्यों? इंकार कर सकती थी। मासूमों इन सब सवालों में उलझ जाओ, भूल जाओ की चिन्मयानंद क्या अय्याशी कर रहा था, सब थोप दो लड़की पर।
चिन्मयानंद तुम मार क्यों नहीं जाते !
तुम मर नहीं सकते मैं जानती हूँ, सब जानते हैँ। तुम्हारा मरना भुलावा हो सकता है सच नहीं। तुम्हारी शक्ति बहुत व्यापक है, तुम्हारा संसार बहुत बड़ा। तुम्हारे हर गलती नज़रअंदाज़ की जा सकती है, तुम्हारी जय जयकार हर गुनाह पर भारी है इसलिए तुम नहीं मरोगे अभी शिकार करोगे, करना सिखाओगे और ये चलता रहेगा अनंत काल तक।
चिन्मयानंद तुम मर क्यों नहीं जाते !
तुम नहीं मरोगे क्योंकि तुम्हारे पास पैसे हैं, तुम्हारे समर्थन में बड़ा हुजूम है, तुम्हारे पास ताकत है, तुम्हारे ड्रामे पर यकीन करने वाले लोग हैं। कुछ दिन यूं ही और बिताओ अस्पताल में। यक़ीन मानो हम भी भूल जाएंगे कि तुम गुनहगार हो। हमें भी तो अपने हिस्से की रोजी-रोटी कमानी है, कब तक एक ही झमेले में पड़े रहेंगे।।
चिन्मयानंद तुम मर क्यों नहीं जाते !
लोग इतने मासूम हैं उन्हें लगता है कि चिन्मयानंद को फंसाने के लिए उस लड़की को भेज गया था। आप सोचिये, दिमाग लगाइए उस लडक़ी का अपना स्वार्थ हो सकता है, आखिर वहाँ गयी ही क्यों? इंकार कर सकती थी। मासूमों इन सब सवालों में उलझ जाओ, भूल जाओ की चिन्मयानंद क्या अय्याशी कर रहा था, सब थोप दो लड़की पर।
चिन्मयानंद तुम मार क्यों नहीं जाते !
तुम मर नहीं सकते मैं जानती हूँ, सब जानते हैँ। तुम्हारा मरना भुलावा हो सकता है सच नहीं। तुम्हारी शक्ति बहुत व्यापक है, तुम्हारा संसार बहुत बड़ा। तुम्हारे हर गलती नज़रअंदाज़ की जा सकती है, तुम्हारी जय जयकार हर गुनाह पर भारी है इसलिए तुम नहीं मरोगे अभी शिकार करोगे, करना सिखाओगे और ये चलता रहेगा अनंत काल तक।
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| सीत मिश्रा |
लेखिका परिचय
सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज में जन्मी सीत मिश्रा की प्रारम्भिक शिक्षा रॉबर्ट्सगंज मे ही हुई। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता करने के बाद 5 साल तक आकाशवाणी दिल्ली समेत कई न्यूज़ चैनलों में बतौर एंकर काम किया। आपकी जनसत्ता, दैनिक-जागरण, राष्ट्रीय सहारा, लमही और पाखी जैसी पत्रिकाओं में नियमित लेख और कुछ कहानियां भी प्रकाशित हुई। आपकी 'दिल्ली हिन्दी साहित्य अकादेमी' से सम्मानित उपन्यास 'रूममेट्स' प्रकाशित हुई है। वर्तमान समय में मुम्बई में रहते हुए आप फ़ीचर फ़िल्म, वेब सीरीज़ व कई एड फ़िल्म का लेखन में व्यस्त है। का लेखन जारी।

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